संध्या (लघु उपन्यास),भाग – XII

(कहानी अब तक https://hemagusain27.wordpress.com/2015/09/22 )

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अब तक आपने पढ़ा  की संध्या एक नवविवाहिता है जो ससुराल में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उसका पति सारंग का व्यवहार उसके प्रति उदासीन है। संध्या कुछ दिनों के लिए अपने मायके रहने जाती है वहाँ उसे अपनी बचपन की सहेली उषा से मिलती है। उषा के साथ कुछ अच्छा समय व्यतीत करने के बाद संध्या कार से ससुराल की और निकलती है किन्तु रास्ते में उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त  हो  जाती है। संध्या  किसी प्रकार बच तो जाती है किन्तु उसका चेहरा बुरी तरह से घायल होता है। संध्या सारंग का इंतज़ार करती है ,किन्तु ना सारंग और ना ही ससुराल से कोई संध्या को मिलने आता है। संध्या इस बात से बड़ी आहत होती है। उसे पता चलता है की जिस कार से उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त हुई थी ,उसमे बैठा  एक मृत्यु हुई थी और एक गर्भवती का गर्भ नष्ट हुआ था ,संध्या उस महिला से मिलने जाती है ,तब उसके सामने कटु सत्य आता  है कि जो व्यक्ति मरा वह और कोई नहीं उसका पति सारंग था। संध्या अपना मानसिक संतुलन खो बैठी। अब आगे… 

“आsssssssss ………ओह माय गॉड ! ओह माय गॉड !!” संध्या इतनी जोर से चीखी कि किसी भी इंसान को एक छोटा -मोटा दिल का दौरा तो पड़ ही जाता।

“चिल यार ,पिम्पल आया है  कोई सुनामी नहीं ! ” उषा ने अपनी बड़ी आँखों को फैलाते हुए कहा , “वैसे तेरे इस पिम्पल के ऊपर मैंने एक धाँसू सा शेर  बनाया है ,बिलकुल ताज़ा और गरमा-गरम। “

“अच्छा?”  संध्या का ध्यान अभी भी शीशे से हटा नहीं था।

“अबे अच्छा नहीं ,इरशाद बोल। ” उषा ने संध्या के पीठ पे एक धौल जमा दी।

“इरशाद ,इरशाद। “

“तो अर्ज़ किया है ,अहम,अहम” उषा ने गला थोड़ा खँखारा,

                                               तेरे चेहरे पे,जो निकल आया है ये पिम्पल…. “

संध्या : वाह ,वाह! वाह वाह !!

उषा :

तेरे चेहरे पे जो निकल आया है ये पिम्पल,

            उसपे मैं वारी वारी जाऊं ,

मोहतरमा दाद चाहूँगी……

                                            तेरे चेहरे पे जो निकल आया है ये पिम्पल,
                                          उसपे मैं वारी वारी जाऊं ,

                                           और नज़र न लगे तुझे कम्बख़त ,

                                           आ गले में तेरे निम्बू -मिर्ची लटकाऊँ। “

“आदाब अर्ज़ है। आदाब अर्ज़ है।” उषा ने झुक के सलाम किया। दोनों सहेलियाँ खिलखिला के हँस दी।

“तेरे इस धाँसू शेर ने मेरे अंदर के शायर को भी जगा दिया। ” संध्या कहा पीछे रहने वाली थी , “दाद चाहूँगी…। “

उषा  :  “इरशाद ,इरशाद। “

संध्या:

     तेरे इस सड़े  से शेर पर , हाय मैं क़ुरबान।

                                        आ पास मेरे ,निकालूँ चप्पल ,ले लूँ तेरी जान।

दोनों इतनी देर तक हँसी कि आज भी उषा के कानो में वो हँसी गूँज रही है।  अपनी 6 महीने के प्रोजेक्ट को पूरा कर उषा थोड़े दिनों पहले ही लंदन से लौटी थी। जिस शाम संध्या की ससुराल में वापसी थी उसी शाम उषा की फ्लाइट भी थी। वापस आ कर  अपनी सहेली का ये हाल देख उषा का दिल रो पड़ा। जो संध्या अपने चेहरे में एक पिम्पल बर्दाश्त नहीं कर सकती थी आज उसका चेहरे पर  हमेशा के लिए दाग़ पड़ गया था।

“कभी सोचा भी नहीं था आंटी ,ऐसा हो जायेगा ” उषा ने दूर सो रही संध्या को निहारते हुए कहा।

“किसी ने भी कब सोचा था बेटी ,” माँ ने आह भरी , “भाग्य  है उसका। “

“अब कैसे तबियत है उसकी ?”

“थेरेपी ले रही है ,दवाइयाँ भी असर कर रही है। अब पहले से बहुत  बेहतर है। ”  माँ ने प्रेम से एक दृष्टि संध्या की और डाली , “पर डॉक्टर कहते है उसे इस माहौल से दूर ले जाऊँ ,कहाँ ले जाऊँ उसे अब,रिश्तेदारों  के घर जा नहीं सकते और संध्या के पिताजी की पेंशन से संध्या का इलाज़ अच्छे से चल जाये वो ही बहुत है। “

“हम्म ”  उषा कुछ सोच में पड़ गई।

“आंटी ,अगर आपको ऐतराज़ ना हो ,तो आप लोग मेरे साथ मुंबई चलिए ,मैंने संध्या के लिए कुछ सोचा है। “

माँ ने उषा के चेहरे पर एक चमक देखी ,दूर कही उम्मीद की किरण नज़र आ रही थी।

(क्रमश:)

12 thoughts on “संध्या (लघु उपन्यास),भाग – XII

  1. One thing I notice about your way of writing, Hema. And I applaud it. Your writing is very natural. When I read you, I visualize it happening around me. Nothing seems superficial or out of the routine. It makes your story so believable and the reader can relate to it immediately. Well done. And for this part of the story, I am relieved to see sunlight at the end of the tunnel. 🙂

  2. This proves your part Hemz….You are as comfortable using powerful words as simple daily conversations…and that makes your writing a complete package! Also the charm about the whole thing is that you actually leave the readers with a thought or a question or suspense! Infact given a choice, you would be apt for writing serials! Gawd…there are so many things I am wishing for you right now!!!!! Hope each of it comes true!!!

  3. Dear Sri, not only you have got one of the most sacred hearts but also the most loving and caring soul.Yes,it is true ,that I wait for the responses from my best buddies and that’s because the beautiful words you all write here is a treat to my heart & my soul.I guess I write so that I can get to read them on daily basis.I am kinda addicted to them.
    How I wish to hug you right here at this moment.
    Love u and love u a lot. ❤

  4. Now this was a wonderful change … amongst the dark cloud a ray of hope seems soothing 🙂 I love the way you carry the conversation ..I told you this before and yet again I am saying it …you mesmerize me with your ability to hold my attention to the tiny details of duologue 🙂 I am looking forward to the next part 🙂 Love for this one ❤

    • Where were you since morning? And it’s soothing to see you comment on my posts. 🙂 I am glad that you like it and the next part is already in progress.This week will mark the end of Sandhya’s journey,till then love her,read & enjoy it.. Lots n hugs n love..<3

      • Sorry ..I am late with the comment 😛 was busy in office work 😦
        Oh you are going to finish the story 😦 that’s bad …I think until you come up with next novella I will be hooked with this one 🙂 So yes I am in love with sandhya 🙂 and with you ❤

      • It’s perfectly ok,I can understand that,you see can be a bit impatient at times. It’s almost three weeks ,i am srting Sandhya and I feel now I must put an end to the story before it gets too boring. :P, respect the love you bestowed on it..But i shall be always here ,with new stories and poems may be.. 🙂

      • 🙂 I understand your impatience …I am like that with my memoirs too 😀 …you are wonderful writer and its my good luck that I met you ❤ and yes I sent you a message on Facebook …and that must be lying in others 😛 so please check it and send me a request as I can't do it because of your privacy settings 😉

  5. बहुत सुन्दर तरीके से इस उपन्यास को लिख रही है आप।
    wah wah
    keep blogging….

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